पिता की मौत के बाद मां ने बकरी पालकर पढ़ाया, अब बेटे ने UPSC में सफल होकर सबको चौंकाया

शिक्षा आज एक ऐसी लाठी है, जिसके दम पर जिंदगी की किसी भी परेशानी को मात दी जा सकती है। शिक्षा की प्रतिभा आपके हुनर की कामयाबी का सफर तय करती है। ऐसे में आज हम बात कर रहे हैं बिहार के मुजफ्फरपुर में रहने वाले विशाल कुमार (Muzaffarpur Vishal Kumar Success Story) की, जिन्होंने देश की प्रतिष्ठित यूपीएससी परीक्षा (UPSC Result 2022) 2022 में 484 वी रैंक हासिल कर अपने कामयाबी के सफर की कहानी (UPSC Topper Muzaffarpur Vishal Kumar) लिखी है।

UPSC Topper Muzaffarpur Vishal Kumar

कौन है मुजफ्फरपुर के विशाल कुमार

मुजफ्फरपुर में रहने वाले विशाल कुमार ने यूपीएससी परीक्षा में 484 वीं रैंक हासिल कर सभी को चौंका दिया है। परिवार में जश्न का माहौल है और आस पड़ोस के सभी लोग उन्हें उनकी कामयाबी के लिए बधाइयां देने आ रहे हैं। खास बात यह है कि विशाल ने पहले ही अटेम्प्ट में लोक सेवा आयोग यानी यूपीएससी की परीक्षा में यह दमदार प्रदर्शन दिखाया है।

UPSC Topper Muzaffarpur Vishal Kumar

मां ने बकरी पालकर किया पालन-पोषण

विशाल के लिए लोक सेवा आयोग की परीक्षा पास करने का यह सफर बिल्कुल भी आसान नहीं था। उनकी जिंदगी में कई परेशानियां आई, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। विशाल का कहना है कि आज उन्होंने जो सपना पूरा किया है, यह उनके पिता ने देखा था। वह अपनी इस कामयाबी का श्रेय अपने परिवार और शिक्षक को देना चाहते हैं।

UPSC Topper Muzaffarpur Vishal Kumar

मुजफ्फरपुर के मीनापुर प्रखंड के मकसूद गांव में रहने वाले विशाल कुमार एक बेहद गरीब परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उनके पिता जब जिंदा थे तो मजदूरी का काम किया करते थे और इसी से परिवार का गुजर-बसर चलता था। साल 2008 में उनके पिता की मृत्यु हो गई। पिता की मौत के बाद उनकी मां ने घर की जिम्मेदारियों को अपने कंधों पर ले लिया। मीना देवी ने बकरी और भैंस पालकर परिवार और बच्चों का लालन पोषण किया।

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शिक्षक को दिया कामयाबी का श्रैय 

मां ने भैंस और बकरी पाल कर बड़ी मुश्किलों से बच्चों को पढ़ाया और उन्हें कभी भी जिंदगी की परेशानियों का एहसास नहीं होने दिया। विशाल का कहना है कि उनकी मां ने कड़ी मेहनत और संघर्षों के साथ उन्हें मेहनत का पाठ पढ़ाया था और यही नतीजा है कि आज वह इस कामयाबी को छु पाएं हैं। विशाल कुमार ने अपनी इस कामयाबी का श्रेय अपने अध्यापकों को भी दिया है। उनका कहना है कि पढ़ाई के दौरान पैसों की कई बार किल्लत होती थी, तब मेरे टीचर गौरीशंकर ने काफी मदद की। उन्होंने मेरी फीस भी दी और जब मैं नौकरी करने लगा आप तो उन्होंने मुझे नौकरी छोड़कर यूपीएससी की तैयारी करने के लिए कहा। इस दौरान भी उन्होंने मेरी आर्थिक तौर पर मदद की। मैं अपनी कामयाबी का श्रैय अपने परिवार और शिक्षक को देना चाहता हूं।