सदी का सबसे बड़ा तूफान,200 किमी की रफ्तार से बढ़ रहा, इन राज्यों पर होगा असर

चक्रवाती तूफान अम्फान आज 20 मई 2020 को दोपहर में भारत के कई राज्यों से टकरा सकती है।ऐसा माना जा रहा है कि यह तूफान उड़ीसा और बंगाल के इलाकों में दोपहर 2:00 बजे तक पहुंच सकती है। साइक्लोन अम्फान इस सदी का सबसे बड़ा तूफान है,यही वजह है कि इसके रास्ते में आने वाले देश के तटीय राज्यों को अलर्ट पर रखा गया है।

ऐसे यह बना सदी का सबसे बडा तूफान

बंगाल और उड़ीसा मे तेज हवाओं और बारिश अभी से ही शुरू है 15 मई को विशाखापट्टनम से 9 किलोमीटर दूर दक्षिणी बंगाल की खाड़ी में कम दबाव बना था,इसी वजह से यह चक्रवाती तूफान आया।17 मई को अम्फान दीघा से 12 किलोमीटर दूर था,तब यह चक्रवात साइक्लोन में बदल गया।18 मई की शाम तक यह चक्रवात सुपर साइक्लोन में बदल गया।मंगलवार दोपहर तक इसकी हवाओं की गति 200 से 240 प्रति घंटा की की रफ्तार पर पहुंच गया यहीं पर यह तूफान सदी के सबसे बड़े और भयानक तूफान बन गया।

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इतने बार आए हैं तूफान

बता दें कि तूफानों के रिकॉर्ड 1990 से जमा किए जाते रहे हैं।130 वर्षों में केवल 4 साल 1893 ,1926 ,1930 और 1976 में कुल 10 बार चक्रवाती तूफान आए हैं। सबसे ज्यादा चक्रवाती तूफान 70 के दशक में आए थे। 70 के दशक में कुल 66 तूफान आए थे। 1967 के बाद सबसे ज्यादा 9 तूफान पिछले साल आए हैं।अम्फान इस सदी का सबसे बड़ा तूफान है

सुबह से ही दिख रहा असर

बुधवार की सुबह से ही उड़ीसा के तटीय क्षेत्रों में तेज हवाएं चलने लगी। इसके अलावे समुद्र के आसपास ऊंची ऊंची लहरें उठ रहे थे।स्थानीय प्रशासन की ओर से लोगों को लगातार तटिए इलाकों से दूर रहने की सलाह दी जा रही है।उड़ीसा में तूफान की स्थिति को देखते हुए कई शेल्टर कैंप स्थापित किए जा चुके हैं।अभी तक राज्यों में करीब 17 से अधिक कैंप लगाए जा चुके हैं। जिनमें से 1 से लाख से भी अधिक लोगों को रखा गया है।

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बंगाल और उड़ीसा मे होगा ज्यादा असर

बंगाल और उड़ीसा दोनों राज्यों में एनडीआरएफ़ की 40 से अधिक टीमें तैनात की गई है। तटीय इलाकों से 2 लाख से भी अधिक लोगों को अभी तक निकाला जा चुका है।समुद्र में मछुआरों को जाने से बिल्कुल ही रोक लगा दी गई है।तूफान मे मदद के लिए एनडीआरएफ और स्थानीय प्रशासन भी काफी जोर-शोर से लगी हुई है। इस तूफान का असर बंगाल,उड़ीसा, सिक्किम, असम, मेघालय, केरल, कर्नाटक और बिहार तक देखने को मिल सकता है।उत्तर  पूर्वी राज्यों को भी अलर्ट पर रखा गया है।