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संसद में राजनाथ सिंह बोले- LAC पर चीन ने जुटाए सैनिक और गोला बारूद, पढ़ें 10 खास बातें | nation – News in Hindi

संसद में राजनाथ सिंह बोले- LAC पर चीन ने जुटाए सैनिक और गोला बारूद, पढ़ें 10 खास बातें

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को भारत-चीन मामले पर बयान दिया (फाइल फोटो)

Rajnath Singh Speech in Loksabha: राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत के पहले भी चीन के साथ विवाद होते रहे हैं, ये विवाद लंबे समय तक चले हैं, हालांकि, इस वर्ष की स्थिति, पहले से बहुत अलग है, फिर भी हम मौजूदा स्थिति के शांतिपूर्ण समाधान के लिए प्रतिबद्ध हैं. पढ़ें 10 खास बातें…


  • News18Hindi

  • Last Updated:
    September 15, 2020, 5:03 PM IST

नई दिल्ली. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Defence Minister Rajnath Singh) ने पूर्वी लद्दाख (North Ladakh) में वास्तविक नियंत्रण रेखा (Line of Actual Control) के पास भारतीय और चीनी सैनिकों (Indian-Chinese Troops) के बीच जारी गतिरोध को लेकर मंगलवार को लोकसभा में बयान दिया. इस बयान में रक्षा मंत्री ने सदन को सीमा की वर्तमान की परिस्थिति से अवगत कराया और कहा कि भारत के सैनिकों पर इस देश को पूरा भरोसा है. राजनाथ सिंह ने कहा कि हम सीमा पर हर परिस्थिति से निपटने कि लिए तैयार हैं. राजनाथ सिंह ने कहा हमने चीन को कूटनीतिक तथा सैन्य चैनलों के माध्यम से यह अवगत करा दिया, कि इस प्रकार की गतिविधियां, यथास्थिति को एकतरफा बदलने का प्रयास है.  यह भी साफ कर दिया गया कि ये प्रयास हमें किसी भी सूरत में मंजूर नहीं है. पढ़ें रक्षा मंत्री के भाषण की 10 बड़ी बातें-

हमारे माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदीजी ने हाल ही में लद्दाख का दौरा कर हमारे बहादुर जवानों से मुलाकात की थी एवं उन्हें यह संदेश भी दिया था कि समस्त देशवासी अपने वीर जवानों के साथ खड़े हैं. मैंने भी लद्दाख जाकर अपने शूरवीरों के साथ कुछ समय बिताया है और मैं आपको यह बताना चाहता हूं कि मैंने उनके अदम्य साहस, शौर्य और पराक्रम को महसूस किया है.

जैसा कि यह सदन अवगत है चीन, भारत की लगभग 38,000 स्क्वायर किमी भूमि का अनधिकृत कब्जा लद्दाख में किए हुए है. इसके अलावा, 1963 में एक तथाकथित सीमा समझौते के तहत, पाकिस्तान ने पीओके की 5180 स्क्वायर किमी भारतीय जमीन अवैध रूप से चीन को सौंप दी है

मई महीने की के प्रारंभ में चीन ने गलवान घाटी क्षेत्र में हमारी सेना के सामान्य, पारंपरिक पेट्रोलिंग पैटर्न में व्यवधान शुरू किया जिसके कारण फेस-ऑफ की स्थिति उत्पन्न हुई. हमने चीन को कूटनीतिक तथा सैन्य चैनलों के माध्यम से यह अवगत करा दिया, कि इस प्रकार की गतिविधियां, यथास्थिति को एकतरफा बदलने का प्रयास है. यह भी साफ कर दिया गया कि ये प्रयास हमें किसी भी सूरत में मंजूर नहीं है.

LAC पर तनातनी को बढ़ता हुआ देख कर दोनों तरफ के सैन्य कमांडरों ने 6 जून 2020 को मीटिंग की. इस बात पर सहमति बनी कि पारस्परिक क्रिया के द्वारा पीछे हटा जाए. दोनों पक्ष इस बात पर भी सहमत हुए कि LAC को माना जाएगा तथा कोई ऐसी कार्रवाई नहीं की जाएगी, जिससे यथास्थिति बदले. इस सहमति के उल्लंघन में चीन द्वारा एक हिंसक झड़प की स्थिति 15 जून को गलवान में पैदा की गई. हमारे बहादुर सिपाहियों ने अपनी जान का बलिदान दिया पर साथ ही चीनी पक्ष को भी भारी क्षति पहुचाई और अपनी सीमा की सुरक्षा में कामयाब रहे. इस पूरी अवधि के दौरान हमारे बहादुर जवानों ने, जहां संयम की जरूरत थी वहां संयम रखा तथा जहां शौर्य की जरुरत थी, वहां शौर्य प्रदर्शित किया.

हम मौजूदा स्थिति का वार्ता के जरिए समाधान चाहते हैं, हमने चीनी हिस्से के साथ कूटनीटिक और सैन्य व्यस्तता को बनाए रखा है. इन वार्ताओं में तीन प्रमुख सिद्धांत हमारी दृष्टिकोणों को तय करते हैं. i) दोनों पक्षों को LAC का सम्मान और कड़ाई से पालन करना चाहिए; (ii) किसी भी पक्ष को अपनी तरफ से यथास्थिति का उल्लंघन करने का प्रयास नहीं करना चाहिए; और (iii) दोनों पक्षों के बीच सभी समझौतों और समझ का पूर्णतया पालन होना चाहिए.

जब ये चर्चा चल ही रही थी, चीन की तरफ से 29 और 30 अगस्त की रात को उत्तेजक सैनिक कार्रवाई की गई, जो पैंगोग त्सो झील के साउथ बैंक इलाके में यथास्थिति को बदलने का प्रयास था. लेकिन एक बार फिर हमारी सेना द्वारा समय पर और मजबूत एक्शन के कारण उनके ये प्रयास सफल नहीं हुए.

जैसा कि उपर्युक्त घटनाक्रम से स्पष्ट है, चीन की कार्रवाई से हमारे विभिन्न द्विपक्षीय समझौतों के प्रति उसकी उपेक्षा दिखती है. चीन द्वारा सैनिकों की भारी मात्रा में तैनाती किया जाना 1993 और 1996 के समझौतों का उल्लंघन है. LAC का सम्मान करना और उसका कड़ाई से पालन किया जाना, सीमा क्षेत्रों में शांति और सद्भाव का आधार है, और इसे 1993 एवं 1996 के समझौतों में स्पष्ट रूप से स्वीकार किया गया है. जबकि हमारी सैन्य ताकतें इसका पूरी तरह पालन करती हैं, चीनी तरफ की ओर से ऐसा नहीं हुआ है.

अभी की स्थिति के अनुसार, चीनी क्षेत्र ने LAC और अंदरूनी क्षेत्रों में बड़ी संख्या में सैनिक टुकड़ियां और गोलाबारूद एकत्र किया हुआ है. पूर्वी लद्दाख और गोगरा, कोंगका ला और पैंगोग झील के उत्तरी और दक्षिणी किनारे पर कई तनाव के क्षेत्र हैं. चीन की कार्रवाई के जवाब में हमारी सैन्य ताकतों ने भी इन क्षेत्रों में उपयुक्त तैनती की हैं ताकि भारत के सुरक्षा हित पूरी तरह सुरक्षित रहें.

मैंने स्पष्ट तरीके से हमारी चिन्ताओं को चीनी पक्ष के समक्ष रखा, जो उनकी बड़ी संख्या में सैनिकों की तैनाती, आक्रामक व्यवहार और एकतरफा यथास्थिति बदलने की कोशिश, (जो द्विपक्षीय समझौते के उल्लंघन) से सम्बंधित था. मैंने यह भी स्पष्ट किया, कि हम इस मुद्दे को शांतिपूर्ण ढंग से हल करना चाहते हैं और हम चाहते हैं कि चीनी पक्ष हमारे साथ मिलकर काम करेंI वहीं हमने यह भी स्ष्ट कर दिया कि हम भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए पूरी तरह से दृढ़-संकल्प हैं.

राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत के पहले भी चीन के साथ विवाद होते रहे हैं, ये विवाद लंबे समय तक चले हैं, हालांकि, इस वर्ष की स्थिति, पहले से बहुत अलग है, फिर भी हम मौजूदा स्थिति के शांतिपूर्ण समाधान के लिए प्रतिबद्ध हैं. उन्होंने कहा कि इसके साथ-साथ मैं सदन को आश्वस्त करना चाहता हूं कि हम सभी परिस्थितियों से निपटने के लिए तैयार हैं.



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